सहारनपुर : सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई के अगले दिन रविवार को मलबा हटाने और सफाई के दौरान करीब 20 फीट गहरा कुआं मिलने से मौके पर प्रशासन की सतर्कता बढ़ गई। कुआं मिलने की सूचना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। अब इस कुएं को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कुआं मिलने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुराने समय में खेतों के अंदर बने ठिकानों या ‘रिठान’ पर मस्जिदें बनाई जाती थीं और ऐसी जगहों पर अक्सर कुएं भी हुआ करते थे। उन्होंने कहा कि उनके यहां आज भी इसका उदाहरण मौजूद है, जहां मस्जिद के बराबर में कुआं है। इमरान मसूद के मुताबिक पुराने समय में पानी के लिए बोरिंग की व्यवस्था नहीं होती थी। कुओं में रहट लगाकर पानी निकाला जाता था और इसी पानी का इस्तेमाल वजू समेत अन्य जरूरतों के लिए किया जाता था। उन्होंने कहा कि कलेक्ट्रेट परिसर में मिला कुआं भी उसी दौर की व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है।
कुएं की जानकारी सामने आने के बाद इसके पुरातात्विक महत्व को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुरातत्व विभाग से इसकी जांच कराए जाने की मांग पर इमरान मसूद ने कहा कि सहारनपुर में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग रहते हैं। ऐसे में इस मामले को हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी संगठन से नहीं, बल्कि प्रशासन के साथ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे मामले का समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में ही होगा। सांसद ने लोगों से मामले को सांप्रदायिक रंग न देने की अपील की।
कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। प्रशासन की ओर से की गई ध्वस्तीकरण कार्रवाई के बाद अब मलबा हटाने के दौरान कुआं मिलने से मामले में एक नया पहलू जुड़ गया है। प्रशासन की ओर से कुएं की स्थिति और उसके संबंध में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी, इस पर अधिकारियों की जांच और रिपोर्ट का इंतजार है।
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